ईश्वर की इच्छा और नियति में जो निर्धारित है, वही समय आने पर घटित होता है : नवजीत भारद्वाज

जालंधर/दिव्य दोआबा ब्यूरो :मां बगलामुखी धाम गुलमोहर सिटी नज़दीक लमांपिंड चौंक जालंधर में श्री शनिदेव महाराज जी के निमित सामुहिक निशुल्क दिव्य हवन यज्ञ का आयोजन मदिंर परिसर में किया गया।
सर्व प्रथम ब्राह्मणो द्वारा मुख्य यजमान तरूण शर्मा से विधिवत वैदिक रिती अनुसार पंचोपचार पूजन, षोडशोपचार पूजन ,नवग्रह पूजन उपरांत सपरिवार हवन-यज्ञ में आहुतियां डलवाई गई।

सिद्ध मां बगलामुखी धाम में आयोजित दिव्य हवन के दौरान भक्तिमय वातावरण में वैदिक मंत्रों की पावन गूंज और हवन कुंड से उठती दिव्य अग्नि ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया। इस अवसर पर पीठ उपासक नवजीत भारद्वाज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए गोस्वामी तुलसीदास जी के प्रसिद्ध दोहे का भावार्थ समझाया—
तुलसी भरोसे राम के, निर्भय हो के सोए।
अनहोनी होनी नहीं, होनी हो सो होए।। “

उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति अपना जीवन प्रभु श्रीराम के चरणों में समर्पित कर देता है, उसके मन से भय और चिंता स्वतः समाप्त हो जाते हैं। संसार में जिसे हम अनहोनी मानते हैं, वह वास्तव में ईश्वर की योजना का ही एक भाग होती है। परमात्मा की इच्छा और नियति में जो निर्धारित है, वही समय आने पर अवश्य घटित होता है।
नवजीत भारद्वाज ने कहा कि सनातन धर्म हमें सिखाता है कि जीवन में जो होना निश्चित है, उसे कोई भी शक्ति टाल नहीं सकती। इसका सर्वोत्तम उदाहरण स्वयं भगवान श्रीराम हैं। अयोध्या में राज्याभिषेक की सभी तैयारियां पूर्ण हो चुकी थीं, लेकिन नियति के विधान के अनुसार उन्हें चौदह वर्ष का वनवास स्वीकार करना पड़ा। यदि स्वयं भगवान श्रीराम ने भी ईश्वर की इच्छा को सहर्ष स्वीकार किया, तो मनुष्य को भी विपरीत परिस्थितियों में धैर्य और विश्वास नहीं खोना चाहिए।

नवजीत भारद्वाज ने कहा कि श्रीराम ने कभी भाग्य को दोष नहीं दिया और न ही कठिन परिस्थितियों में अपने धर्म, मर्यादा और कर्तव्य से विचलित हुए। उन्होंने हर परिस्थिति को ईश्वर की इच्छा मानकर स्वीकार किया और इसी आदर्श आचरण के कारण वे मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाए।
प्रवचन के दौरान उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में ऐसे क्षण आते हैं, जब सब कुछ अनुकूल दिखाई देता है और अचानक परिस्थितियां बदल जाती हैं। कभी व्यापार में हानि होती है, कभी रोजगार छूट जाता है, कभी स्वास्थ्य साथ नहीं देता और कभी अपने भी दूर हो जाते हैं। ऐसे समय में निराश होने के बजाय यह विश्वास रखना चाहिए कि प्रभु जो भी करते हैं, वह अंततः हमारे कल्याण के लिए ही होता है।
प्रवचन के समापन पर नवजीत भारद्वाज ने कहा कि कठिनाइयां मनुष्य को कमजोर करने के लिए नहीं, बल्कि उसे और अधिक मजबूत बनाने के लिए आती हैं। जिस प्रकार सोना अग्नि में तपकर कुंदन बनता है, उसी प्रकार विपत्तियां मनुष्य के व्यक्तित्व को निखारती हैं।
उन्होंने श्रद्धालुओं को संदेश देते हुए कहा कि जीवन में आने वाली हर परिस्थिति को ईश्वर का प्रसाद मानकर स्वीकार करें, धैर्य रखें, अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करें और प्रभु का निरंतर स्मरण करते रहें। जब विश्वास अटल होता है, तब हर कठिनाई भी आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग बन जाती है।

इस अवसर पर श्वेता भारद्वाज,सरोज बाला, समीर कपूर, विक्की अग्रवाल,सौरभ भाटिया,विवेक अग्रवाल, मुनीष मैहरा, ऋषभ कालिया, कमलजीत,बलजिंदर सिंह,उदय ,अजीत कुमार , नरेंद्र ,रोहित भाटिया,नवीन , प्रदीप, सुधीर, सुमीत,सौरभ ,शंकर, संदीप,रिंकू,प्रदीप,संजीव शर्मा, रोहित भाटिया,मुकेश, रजेश महाजन ,अमनदीप शर्मा, गुरप्रीत सिंह, विरेंद्र सिंह, अमन शर्मा, नवीन कुमार,प्रिंस कुमार, दीपक कुमार, नरेंद्र, सौरभ,दीपक कुमार, नरेश,अनिल, कमल, अजय,बलदेव सहित भारी संख्या में भक्तजन मौजूद थे।
हवन यज्ञ उपरांत लंगर भंडारे का आयोजन किया गया

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